चूत की आग मजदूर के लौड़े से बुझी

यह कहानी मेरी है। मैं रेशमा, 34 साल की, नई शादीशुदा और गर्म मिजाज औरत हूं। मेरे पति एक कंपनी में जॉब करते हैं, जहां उनका ट्रांसफर नई जगह हुआ है।

 

हम नई जगह शिफ्ट हो गए और वहां हमें रहने के लिए घर कंपनी की तरफ से मिला। हर बिल्डिंग 3 फ्लोर की थी। हमें सबसे नीचे वाला फ्लोर मिला। मैं वहां नई थी, तो ज्यादा किसी से बात नहीं करती थी। अधिकतर मैं नाइटी में ही रहती थी। एक दिन यहां कुछ लोगों की आवाज आई। वह लोग बात कर रहे थे कि यह काम होना है, वह काम होना है। उनकी बातें सुनकर मुझे पता लगा कि यहां मेंटेनेंस का काम होना है। हमारी बिल्डिंग के पीछे वाली बिल्डिंग में काम शुरू हो गया था। पहले उन्होंने पीछे वाली बिल्डिंग से काम शुरू किया। हमारे फ्लोर पर विंडो थी, जिससे काम की जगह दिखाई पड़ती थी। मैंने सोचा मेरा भी टाइम पास हो जाएगा इन्हें काम करता देखकर। मैं खिड़की पर पर्दा डालकर खड़ी रहती थी। फिर मैंने पर्दा हटा दिया ताकि मैं अपना टाइम पास कर सकूँ।

 

अगले दिन वहां एक लगभग 55 साल का अधेड़ मर्द आया, जिसका जिस्म बड़ा, लंबा-चौड़ा और गठीला था। मैंने सोचा कि वह कोई खुदाई करने आया होगा। वह आया, उसने धोती उठाकर पेशाब करना चालू कर दिया। पहले तो मैं बहुत शर्मा गई, फिर मैंने उसका लौड़ा देखा, वह किसी घोड़े के लौड़े से कम नहीं था।

 

अब जैसे कि मैंने बताया कि खिड़की से बाहर का अंदर तो कोई नहीं देख सकता था, पर बाहर से अंदर सब दिखता था। उसके बाद मैं खुदाई करते हुए उसे देखने लगी और साथ-साथ अपनी चूत को रगड़ने लगी। थोड़ी देर बाद उसका मोटा, काला, हाथी जैसा लंड मेरे दिमाग में चलने लगा और मैं झड़ गई।

 

और फिर ऐसे ही लेटी रही। कुछ देर बाद नहाकर देखा, वह काम करके जा रहा था और मैं खाना बनाने चली गई।

 

रात को जब मेरे पति आए, मेरा जिस्म चुदाई की आग में भड़क रहा था। मैं खाना खाने के बाद अपने पति को सहलाने लगी तो मेरा पति दूसरी तरफ मुंह करके सो गया और बोला, ‘मैं बहुत थका हुआ हूं।’

 

मैं पूरी रात सो नहीं पाई। उस मजदूर का शानदार लौड़ा मेरी आंखों के आगे घूम रहा था और मैं खौफनाक चुदाई के सुनहरे सपने देख रही थी।

 

अगले दिन मैं सुबह उठी और पति को नाश्ता बनाकर दिया। रोज की तरह वह ऑफिस चले गए। उनके जाने के बाद मैं नहाने गई और चूत के बालों को साफ किया, क्योंकि उस मजदूर के आने का टाइम हो रहा था और मैं फटाफट काम निपटाकर उस मजदूर के लंड को देखने के लिए तड़प रही थी।

 

मेरी चूत एकदम रसीली और साफ हो गई थी, मानो किसी नई नवेली जवान लड़की की तरह।

 

मैंने लाइट ऑफ कर दी और एक पतली स्पेगेटी पहन ली। स्पेगेटी पतली ब्रा जैसी होती है, जिसमें मेरे गोरे, बड़े चुचे एकदम साफ चमक रहे थे।

 

और उसके आते ही मैं झुककर चादर ठीक करने लगी। मेरे पूरे जिस्म पर एक पतली कच्ची और स्पेगेटी थी। मेरी पतली कमर और मोती जंघाएं किसी भी मर्द की कामवासना को उत्तेजित कर सकती थी, पर मुझे उस मजदूर के हथौड़े जैसा लौड़ा ही अपनी चूत पर बजवाना था।

 

थोड़ी देर बाद मैं उल्टी हो गई, डॉगी स्टाइल में, जिससे वह मेरी कच्ची के अंदर चूत की छाप को अच्छी तरह देख पाए। उसके बाद मैं सीधी होकर इधर-उधर देखने का नाटक करने लग गई।

 

और वह खिड़की पर आया और बोला, ‘मालकिन, पानी मिलेगा?’

 

मैं चौंक गई और थोड़ा सा डर भी गया। मैं शर्मा कर उसे जवाब दिया, ‘आ जाओ, अंदर आ जाओ।’ मैंने ब्रा नहीं पहनी थी तो मेरे चुचे गजब हिल रहे थे।

 

उसे पानी देकर मैंने देखा, धोती में से उसका लौड़ा सांप जैसा खड़ा दिखाई दे रहा था और वह उसे हाथ से दबा रहा था ताकि मैं उसे ना देखूं।

 

उसके बाद एकदम से मैंने मोच आने का नाटक किया और जोर से चिल्लाई। वह बोला, ‘क्या हुआ?’

 

मैं बोली, ‘अरे, पैर में मोच आ गई।’

 

वह बोला, ‘अरे मालकिन, आप बैठ जाओ, मैं बाम लगा देता हूं।’

 

उसने मुझे सहारा दिया और मैंने नाटक किया कि मैं चल नहीं पा रही हूं। उसने मुझे रूम तक सहारा दिया, तब उसने बिना कुछ सोचे मुझे गोद में उठा लिया। मैंने उसकी मर्दाना ताकत का अंदाजा इस वक्त लगा लिया था, जब मानो उसने मुझे एक फूल के समान उठा लिया।

 

मैंने उसको इशारा करते हुए बाम उठाने को कहा। उसने बाम उठा लिया और मुझे देखने लगा। मैंने कहा, ‘इसे मेरे पैर पर लगा दो।’

 

उसने मुझे बेड पर लिटाया। मैंने पहले दिमाग लगाकर पीछे की तरफ बाम लगाने को कहा, जिससे उसकी झिझक खत्म हो जाए। मैं उल्टी होकर लेट गई और बाम लगाने को कहा। उसने मेरे पैर में बाम लगाना शुरू कर दिया। उसने कहा, ‘घुटनों के ऊपर बाम लगाऊं?’

 

वह मेरे घुटनों के ऊपर बाम लगाकर मेरी रेशमी टांगों को मिलते-मलते थोड़ा सा आनंद लेने लगा। जब मैंने समझ लिया कि यह मत हो गया है, तो मैं सीधी हो गई और आंखें बंद करके लेट गई।

 

मेरे पैरों को आगे की तरफ से बम लगाने लगा और मैं मुलायम टांगों को अपने सख्त हाथों से मारने लगा। मैंने हल्की आंख खोलकर देखा तो उसका लौड़ा लोहे की तरह कड़क हो गया था।

 

मेरी जांघों पर बम लगाते-लगाते वह मेरी चूत तक आ गया और मेरी चूत पर हाथ-पैर से पहना। मेरे मुंह से “आं” की आवाज निकली।

 

उसने अपना हाथ मेरी स्पेट में डाला और मेरे बस को सहलाने लगा। मैंने आंखें खोलीं और उसके लंड को धोती के अंदर से सहलाने लगी। उसने स्पेगेटी निकाल दिया और बोला, ‘तू तो बड़ा मस्त माल है।’

 

मैं बोली, ‘अच्छा तो लूट ले मेरे मजे।’ यह बोलते ही उसने मेरे चूचू को चूसने लगा। मैं भी उसे पूरी तरह जकड़ दिया और उससे लिपट गई।

 

वह मेरे बबलू को तेज-तेज मसलने लगा और बीच में दांतों से मसान लगा, जिससे मैं बहुत उत्तेजित हो गई और चूत का पानी भी बहने लगा।

 

मैंने कहा, ‘है है, आराम से करो, मुझे बहुत सनसनी हो रही है।’

 

उसके बाद उसने मेरी पैंटी उतारी और चूत को चाटने लगा। मेरे मुंह से तेज आवाजें निकलने लगीं और उसकी जिप मेरी चूत से ऐसे खेल रही थी जैसे मेरी चूत बनी ही उसके भोसड़े से पानी निकालने के लिए हो।

 

मेरी आवाज सुनकर वह गर्म हो गया। उसने ऊपर जाकर अपना मर्द हाथी की तरह मेरे मुंह के आगे खड़ा कर दिया। उसका लंड मुझे मोहित कर रहा था। मैंने बिना सोच-समझ उसका पूरा लंड अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी।

 

उसका कड़क लौड़ा मेरे मुंह में पूरी तरह जा नहीं रहा था और मेरे मुंह से आवाज निकल रही थी। उसने मेरे मुंह में जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए।

 

करीब 10 मिनट बाद मेरे मुंह छोड़ने के बाद उसने मेरे तांगे खोली और मेरी चूत पर मसलने लगा। मैंने उसके लंड को बिना देरी किए अपने चूत में संभाल लेना चाहती थी। उसने भी कोई देर नहीं की और अपना हप्सी लंड मेरी चूत में दे मारा। उसका लौड़ा मेरी चूत को फटता हुआ अंदर घुस गया। मैं दर्द से कांप रही थी और मस्त-मस्त हो रही थी। उसने मेरा मुंह अपने हाथ से दबाया हुआ था और कुछ देर बाद मुझे राहत मिलने लगी। मैंने नीचे कर देखा तो उसका लंड अभी भी काफी बाहर रह गया था। मैंने उसकी आंखों में अपनी मनमानी करने की चाहत देखी।

 

मैं बोली, ‘बस और अंदर मत डालना।’ उसने मेरी बातों को अनसुना कर दिया और हल्के-हल्के धक्के मारने लगा। कुछ समय के बाद मुझे मजा आने लगा और उसने देखा कि मैं कितनी रसीली हूं और गर्म हूं।

 

वह बोला, ‘क्या देश में छूट है? तेरा पति तो रोज तेरी छूट के मजे उठाता होगा।’ यह सुनकर मेरी शक्ल उदास हो गई और इस समय मैं उसका पूरा लौड़ा जोर लगाकर अपनी चूत में घुसेड़ दिया। दर्द के मारे मेरी चीज निकल गई और वह शैतानों की तरह हंसने लगा। उसकी हंसी देखकर मुझे अपनी चूत से निकलती हुई गर्मी और छोड़ने की चाहत को डबल होते हुए देखा। मानो मैं अपनी चूत को उसके लौड़े पर लड्डू की तरह नचा देना चाहती थी।

 

उसने फौरन मेरे होठों को चूसना शुरू कर दिया। मुझे उसके लंड से छुड़वाने में बहुत मज़ा आ रहा था। वह मेरी चूत में ही झड़ गया और उसके बाद बोला, ‘मैं तुम्हें घोड़ी बनाकर दोबारा छोड़ना चाहता हूं।’

 

मैं अपने जिस्म का दर्द भूलकर छुड़वाने की चाहत में फटाफट घोड़ी बन गई और उसने अपना जिला हथियार मुझे चुस्वाया और वापस से मेरी चूत में घुसेड़ दिया। खूब देर मेरी घोड़ी बनाकर लेने के बाद मैंने उससे बोली, ‘मैं बहुत बाल झड़ चुकी हूं, किसी ने मुझे आज तक ऐसा नहीं छोड़ा।’

 

वह बोला, ‘मैं छूट के बाद तेरी गांड भी मारना चाहता हूं।’

 

मैंने कहा, ‘तेरा लौड़ा वैसे ही मेरी चूत के अंदर काफी दर्द दे रहा है, गांड में तो तू गड्ढा ही कर देगा।’

 

वह बोला, ‘अच्छा, आज रात अपनी गांड में तेल लगाकर एक पतली बोतल घुसेड़कर सो जाना। सुबह तक तुम्हारी गांड चोदने के लिए तैयार हो जाएगी।’

 

मैंने कहा, ‘कोशिश करूंगी।’ वह मेरी चूत मारते-मारते बोला, ‘पहले कभी गांड मरवाई है?’ मैंने कहा, ‘नहीं, मेरे पति को शौक नहीं है।’ वह हंसने लगा और बोला, ‘तेरा पति बहुत बेकार है, उसने तेरी प्यारी चूत को अच्छे से खोला भी नहीं है।’

 

मेरी चुदाई करते-करते उसने मुझे कई बार झाड़ और खुद भी झड़ गया।

 

मेरे बगल में लेटकर वह बीड़ी पीने लगा और मुझे बोला, ‘मेरे लंड को चाटकर साफ कर दे।’ मैंने वैसा ही किया।

 

उसके जाने के बाद मैं नहाने गई और उंगली चूत में डालकर ढेर सारा माल खाया और मजदूर से चुदाई करवा कर मुझे बड़ा मजा आया।

 

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